SHAYRI SPETIAL

गुरुवार, 10 दिसंबर 2015

खुदा तु भी कारीगर निकला.. खीच दी दो-तीन लकीरें हाथों में.. ये भोला आदमी उसे, तकदीर समझ बैठा..!!
प्रस्तुतकर्ता Uttam Singh पर 7:34 pm
इसे ईमेल करेंइसे ब्लॉग करें! X पर शेयर करेंFacebook पर शेयर करेंPinterest पर शेयर करें

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नई पोस्ट पुरानी पोस्ट मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

ब्लॉग आर्काइव

  • ►  2017 (1)
    • ►  जुलाई (1)
  • ►  2016 (2)
    • ►  नवंबर (1)
    • ►  जून (1)
  • ▼  2015 (4)
    • ▼  दिसंबर (3)
      • खुदा तु भी कारीगर निकला.. खीच दी दो-तीन लकीरें हा...
      • चेहरे की हंसी से ग़म को भुला दो, कम बोलो पर सब कु...
      • मिठास ,,,मुँह मैं घुले तो.. स्वाद,,,दिल मैं घुले ...
    • ►  अगस्त (1)
सरल थीम. Blogger द्वारा संचालित.